Adhyāya 33: Antarvedī-Samāgama, Arghya-Nirṇaya, and Śiśupāla’s Objection
अधियज्ञांश्न॒ सम्भारान् धौम्योक्तान् क्षिप्रमेव हि । समानयमन्तु पुरुषा यथायोगं यथाक्रमम्,“इस यज्ञके लिये ब्राह्मणोंके बताये अनुसार यज्ञके अंगभूत सामान, आवश्यक उपकरण, सब प्रकारकी मांगलिक वस्तुएँ तथा धौम्यजीकी बतायी हुई यज्ञोपयोगी सामग्री >-इन सभी वस्तुओंको क्रमशः जैसे मिलें, वैसे शीघ्र ही अपने सेवक जाकर ले आवें
adhiyajñāṁś ca sambhārān dhaumyoktān kṣipram eva hi | samānayantu puruṣā yathāyogaṁ yathākramam ||
धौम्य के बताए हुए यज्ञोपयोगी यज्ञांग-सामान को पुरुष (सेवक) शीघ्र ही ले आएँ और उसे यथायोग्य, यथाक्रम व्यवस्थित करें।
वैशम्पायन उवाच