Adhyāya 33: Antarvedī-Samāgama, Arghya-Nirṇaya, and Śiśupāla’s Objection
वैशम्पायन उवाच अनुज्ञातस्तु कृष्णेन पाण्डवो भ्रातृभि: सह | ईजितुं राजसूयेन साधनान्युपचक्रमे,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! भगवान् श्रीकृष्णसे आज्ञा लेकर भाइयोंसहित पाण्डुनन्दन युधिष्ठिरने राजसूययज्ञ करनेके लिये साधन जुटाना आरम्भ किया
Vaiśampāyana uvāca: anujñātas tu kṛṣṇena pāṇḍavo bhrātṛbhiḥ saha | ījituṃ rājasūyena sādhanāny upacakrame ||
वैशम्पायन बोले—जनमेजय! श्रीकृष्ण से अनुमति पाकर पाण्डुनन्दन युधिष्ठिर ने भाइयों सहित राजसूय यज्ञ करने के लिए आवश्यक साधन जुटाना आरम्भ किया।
वैशम्पायन उवाच