Adhyāya 32: Rājasūya-Dīkṣā and Appointment of Court Offices (राजसूयदीक्षा तथा अधिकारविनियोगः)
द्वारपालं च तरसा वशे चक्रे महाद्युति: । फिर सम्पूर्ण पंचनददेश (पंजाब), अमरपर्वत, उत्तरज्योतिष, दिव्यकट नगर और द्वारपालपुरको अत्यन्त कान्तिमान् नकुलने शीघ्र ही अपने अधिकारमें कर लिया ।। ११ $ || रामठान् हारहृणांश्व प्रतीच्याश्नैव ये नृपा:,रामठ, हार, हूण तथा अन्य जो पश्चिमी नरेश थे, उन सबको पाण्डुकुमार नकुलने आज्ञामात्रसे ही अपने अधीन कर लिया। भारत! वहीं रहकर उन्होंने वसुदेवनन्दन भगवान् श्रीकृष्णके पास दूत भेजा
dvārapālaṃ ca tarasā vaśe cakre mahādyutiḥ |
वैशम्पायन बोले—महातेजस्वी नकुल ने वेगपूर्वक द्वारपाल तक को अपने वश में कर लिया। फिर उसने पंचनददेश (पंजाब), अमरपर्वत, उत्तरज्योतिष, दिव्यकट नगर और द्वारपालपुर को भी शीघ्र ही अपने अधिकार में कर लिया।
वैशम्पायन उवाच