अर्जुनस्योत्तरदिग्विजयः
Arjuna’s Northern Conquests and Tribute Collection
हयैर्दिव्यै: समायुक्तो रथो वायुसमो जवे । अधिष्तित: स शुशुभे कृष्णेनातीव भारत,वह रथ वायुके समान वेगशाली था, उसमें दिव्य घोड़े जुते हुए थे। भारत! श्रीकृष्णके बैठ जानेसे उस दिव्य रथकी बड़ी शोभा हो रही थी
hayair divyaiḥ samāyukto ratho vāyusamo jave | adhiṣṭhitaḥ sa śuśubhe kṛṣṇenātīva bhārata ||
दिव्य अश्वों से युक्त वह रथ वायु के समान वेगवान था। हे भारत! श्रीकृष्ण के उस पर आरूढ़ होते ही वह दिव्य रथ और भी अधिक शोभायमान हो उठा।
वैशम्पायन उवाच