अर्जुनस्य दिग्विजयारम्भः — Arjuna Initiates the Northern Campaign and Secures Bhagadattta’s Tribute
एवमुक्त: स कृष्णेन पाण्डव: परवीरहा । जरासंधस्य तद् रूपं ज्ञात्वा चक्रे मतिं वधे,भगवान् श्रीकृष्णके ऐसा कहनेपर शत्रुवीरोंका नाश करनेवाले पाण्डुकुमार भीमसेनने जरासंधको थका हुआ जानकर उसके वधका विचार किया
evam uktaḥ sa kṛṣṇena pāṇḍavaḥ paravīrahā | jarāsandhasya tad rūpaṃ jñātvā cakre matiṃ vadhe ||
श्रीकृष्ण के ऐसा कहने पर शत्रुवीरों का संहार करनेवाले पाण्डव भीमसेन ने, जरासंध की वह दशा जानकर, उसके वध का निश्चय किया।
श्रीकृष्ण उवाच