Jarāsandha–Vāsudeva Saṃvāda: Kṣātra-Dharma, Pride, and the Ethics of Coercion
Sabhā Parva, Adhyāya 20
युधिछिर उवाच अच्युताच्युत मा मैवं व्याहरामित्रकर्शन । पाण्डवानां भवान् नाथो भवन्तं चाश्रिता वयम्,युधिष्ठिर बोले--अपनी मर्यादासे कभी च्युत न होनेवाले शत्रुसूदन अच्युत! आप ऐसी बात न कहें, न कहें। आप हम सब पाण्डवोंके स्वामी हैं, रक्षक हैं; हम सब लोग आपकी शरणमें हैं
युधिष्ठिर बोले—हे अच्युत, शत्रुसूदन! आप ऐसी बात न कहें। आप हम पाण्डवों के स्वामी और रक्षक हैं; हम सब आपकी शरण में हैं।
युधिछिर उवाच