मागधगिरिव्रजप्रवेशः — Entry into Girivraja and Jarāsandha’s Protocol Inquiry
एष धारयिता सम्यक् चातुर्वर्ण्य महाबल: । शुभाशुभमिव स्फीता सर्वसस्यधरा धरा,“यह महाबली राजकुमार चारों वर्णोको भलीभाँति धारण करेगा (उन्हें आश्रय देगा;) ठीक वैसे ही, जैसे सभी प्रकारके धान्योंको धारण करनेवाली समृद्धिशालिनी पृथ्वी शुभ और अशुभ सबको आश्रय देती है
यह महाबली राजकुमार चारों वर्णों को भलीभाँति धारण करेगा (उन्हें आश्रय देगा); ठीक वैसे ही, जैसे सब प्रकार के धान्यों को धारण करने वाली समृद्धिशालिनी पृथ्वी शुभ और अशुभ—सबको आश्रय देती है।
श्रीकृष्ण उवाच