Jarāsandha as Obstacle to the Rājasūya — Kṛṣṇa’s Strategic Genealogical Brief
Sabhā Parva, Adhyāya 13
पाण्डवस्तर्कयामास कर्मभिदरदेवसम्मतै: । नास्य किंचिदविज्ञातं नास्य किंचिदकर्मजम्,पाण्डुनन्दन युधिष्ठिरने श्रीकृष्णके देवपृूजित अलौकिक कर्मोंद्वारा यह अनुमान किया कि श्रीकृष्णके लिये कुछ भी अज्ञात नहीं है तथा कोई भी ऐसा कार्य नहीं है, जिसे वे कर न सकें
पाण्डुनन्दन युधिष्ठिर ने देवताओं द्वारा पूजित श्रीकृष्ण के अलौकिक कर्मों से यह अनुमान किया कि उनके लिए कुछ भी अज्ञात नहीं है और ऐसा कोई कार्य नहीं जिसे वे कर न सकें।
वैशम्पायन उवाच