Pitāmaha-sabhā-varṇana & Hariścandra-māhātmya
Description of Brahmā’s Assembly and the Eminence of Hariścandra
अदितिर्दितिर्दनुश्वैव सुरसा विनता इरा,अदिति, दिति, दनु, सुरसा, विनता, इरा, कालिका, सुरभी देवी, सरमा, गौतमी, प्रभा और कद्रू-ये दो देवियाँ, देवमाताएँ, रुद्राणी, श्री, लक्ष्मी, भद्रा तथा अपरा, षष्ठी, पृथ्वी, भूतलपर उतरी हुई गंगादेवी, लज्जा, स्वाहा, कीर्ति, सुरादेवी, शची, पुष्टि, अरुन्धती संवृत्ति, आशा, नियति, सृष्टिदेवी, रति तथा अन्य देवियाँ भी उस सभामें प्रजापति ब्रह्माजीकी उपासना करती हैं
aditir ditir danuś caiva surasā vinatā irā kālikā surabhī devī saramā gautamī prabhā ca kadrūś ca—ete devyo devamātaraḥ; rudrāṇī śrīr lakṣmīr bhadrā cāparā ṣaṣṭhī pṛthivī bhūtale ’vatīrṇā gaṅgādevī lajjā svāhā kīrtiḥ surādevī śacī puṣṭir arundhatī saṃvṛttir āśā niyatiḥ sṛṣṭidevī ratiś cānyāś ca devyaḥ sabhāyāṃ prajāpatiṃ brahmāṇam upāsate.
नारद ने कहा—उस राजसभा में अनेक देवमाताएँ और देवियाँ—अदिति, दिति, दनु, सुरसा, विनता, इरा, कालिका, सुरभी, सरमा, गौतमी, प्रभा और कद्रू; तथा रुद्राणी, श्री (लक्ष्मी), भद्रा, अपरा, षष्ठी, पृथ्वी और भूतल पर उतरी हुई गंगादेवी; और लज्जा, स्वाहा, कीर्ति, सुरादेवी, शची, पुष्टि, अरुन्धती, संवृत्ति, आशा, नियति, सृष्टिदेवी, रति तथा अन्य देवियाँ भी—सब प्रजापति ब्रह्माजी की भक्ति-पूर्वक उपासना कर रही थीं।
नारद उवाच