Pitāmaha-sabhā-varṇana & Hariścandra-māhātmya
Description of Brahmā’s Assembly and the Eminence of Hariścandra
सुसुखा सा सदा राजन् न शीता न च घर्मदा । न क्षुत्पिपासे न ग्लानिं प्राप्य तां प्राप्तुवन्त्युत
susukhā sā sadā rājan na śītā na ca gharmadā | na kṣutpipāse na glāniṁ prāpya tāṁ prāptuvanty uta ||
नारद बोले—राजन्! वह लोक सदा परम सुखमय है; वहाँ न शीत का कष्ट है, न घाम की दाह। वहाँ न भूख-प्यास उठती है, न थकावट; और जो वहाँ पहुँचते हैं, वे देहगत पीड़ा से ऐसी ही मुक्ति पा लेते हैं।
नारद उवाच