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Shloka 1

Pitāmaha-sabhā-varṇana & Hariścandra-māhātmya

Description of Brahmā’s Assembly and the Eminence of Hariścandra

अपना बा अर: 2 एकादशोब< ध्याय: ब्रह्माजीकी सभाका वर्णन नारद उवाच पितामहसभां तात कथ्यमानां निबोध मे । शक्‍्यते या न निर्देष्टमेवंसूपेति भारत,नारदजी कहते हैं--तात भारत! अब तुम मेरे मुखसे कही हुई पितामह ब्रह्माजीकी सभाका वर्णन सुनो! वह सभा ऐसी है, इस रूपसे नहीं बतलायी जा सकती

नारदजी बोले—तात भारत! अब मेरे मुख से कही हुई पितामह ब्रह्माजी की सभा का वर्णन सुनो। वह सभा ऐसी है कि उसका स्वरूप यथावत् बतलाया नहीं जा सकता।

नारद उवाच