विस््रस्तयन्त्रकवचा: कांदिग्भूता विचेतस: । अन्योन्यमवमृदनन्तो वीक्षमाणा भयार्दिता:,उनके यन्त्र और कवच गिर गये थे। वे अचेत होकर यह भी नहीं सोच पाते थे कि हम भागकर किस दिशामें जायँ? एक-दूसरेको कुचलते और चारों ओर देखते हुए भयसे पीड़ित हो गये थे
visrastayantrakavacāḥ kāndigbhūtā vicetasaḥ | anyonyamavamṛdnanto vīkṣamāṇā bhayārditāḥ ||
संजय बोले—उनके यन्त्र और कवच गिर पड़े थे। वे दिग्भ्रमित और अचेत हो गए थे; भागकर किस दिशा में जाएँ, यह भी न सोच पाते थे। भय से पीड़ित होकर वे एक-दूसरे को कुचलते और चारों ओर देखते फिरते थे।
संजय उवाच