तत्रावधीत्तत: क्रुद्ध शशशो5थ सहस्रश: । तत् सैन्यं पाण्डवेयानां योधयामास सर्वतः
वहाँ दुर्योधन क्रुद्ध होकर सैकड़ों और फिर हजारों योद्धाओं का संहार करने लगा। वह चारों ओर घूम-घूमकर पाण्डवों की सेना से युद्ध करता रहा।
संजय उवाच