त॑ वै प्रमृष्ट प्रसमीक्ष्य युद्धे चचाल सर्व सचराचरं जगत् | स्वस्ति जगत् स्यादृषय: प्रचुक्रुशु- स्तमुद्यतं प्रेक्ष्य महाहवेषुम्,महायुद्धमें उस बाणको हाथमें लिया और ऊपर उठाया गया देख समस्त चराचर जगत् काँप उठा। ऋषिलोग चोर-जोरसे पुकार उठे कि 'जगत्का कल्याण हो!”
महायुद्ध में उस बाण को हाथ में लेकर ऊपर उठाया हुआ देख, समस्त चराचर जगत् काँप उठा। उसे उठा हुआ देखकर ऋषियों ने ऊँचे स्वर में पुकारा—“जगत् का कल्याण हो!”
संजय उवाच