ततः किरीटी भृशमुग्रनि:स्वनं महाशरं सर्पविषानलोपमम् । अयस्मयं रौद्रमहास्त्रसम्भृतं महाहवे क्षेप्तुमना महामति:,तब परम बुद्धिमान् किरीटधारी अर्जुनने उस महासमरमें कर्णपर भयानक शब्द करनेवाले, सर्पवविष और अग्निके समान तेजस्वी लोहनिर्मित तथा महारौद्रास्त्रसे अभिमन्त्रित विशाल बाण छोड़नेका विचार किया
tataḥ kirīṭī bhṛśam ugraniḥsvanaṃ mahāśaraṃ sarpaviṣānalopamam | ayasmayaṃ raudramahāstrasambhṛtaṃ mahāhave kṣeptumanā mahāmatiḥ ||
संजय बोले—तब परम बुद्धिमान् किरीटधारी अर्जुन ने उस महासमर में कर्ण पर छोड़ने के लिए एक विशाल बाण का संकल्प किया, जो अत्यन्त उग्र शब्द करने वाला था, सर्प-विष और अग्नि के समान तेजस्वी था, लोहे का बना था और भयानक महारौद्रास्त्र से अभिमन्त्रित था।
संजय उवाच