अध्याय ९ — कर्णस्य प्रहारः, योधयुग्मनियोजनम्, शैनेय-कैकेययोर्युद्धविन्यासः
पुन: पुनर्न मृष्यामि हतं कर्ण च पाण्डवै: । यस्य बाह्ोर्बलं तुल्यं कुज्जराणां शतं शतै:,जिसकी भुजाओंमें दस हजार हाथियोंका बल था, वह कर्ण पाण्डवोंद्वारा मारा गया, यह बारंबार सुनकर मुझसे सहा नहीं जाता
punaḥ punar na mṛṣyāmi hataṃ karṇaṃ ca pāṇḍavaiḥ | yasya bāhor balaṃ tulyaṃ kuñjarāṇāṃ śataṃ śataiḥ ||
जिसकी भुजाओं में सैकड़ों-सैकड़ों हाथियों के समान बल था, वह कर्ण पाण्डवों द्वारा मारा गया—यह बात बार-बार सुनकर मुझसे सहन नहीं होती।
वैशम्पायन उवाच