अध्याय ९ — कर्णस्य प्रहारः, योधयुग्मनियोजनम्, शैनेय-कैकेययोर्युद्धविन्यासः
पर्वतस्येव शिखरं वज़्पाताद विदारितम् | जैसे वज़्के आघातसे विदीर्ण किया हुआ पर्वतशिखर धराशायी हो जाता है, उसी प्रकार बाणोंसे पीड़ित हुआ अधिरथपुत्र कर्ण निश्चय ही रथसे नीचे गिर पड़ा होगा ।। स शेते पृथिवीं नूनं शोभयन् रुधिरोक्षित:
dhṛtarāṣṭra uvāca | parvatasyeva śikharaṃ vajrapātād vidāritam | śete pṛthivīṃ nūnaṃ śobhayan rudhirokṣitaḥ ||
जैसे वज्रपात से विदीर्ण पर्वत-शिखर धराशायी हो जाता है, वैसे ही बाणों से पीड़ित अधिरथपुत्र कर्ण निश्चय ही रथ से नीचे गिर पड़ा। अब वह रक्त से सिक्त होकर पृथ्वी पर पड़ा है, और उसे भीषण शोभा दे रहा है।
धृतराष्ट उवाच