अध्याय ९ — कर्णस्य प्रहारः, योधयुग्मनियोजनम्, शैनेय-कैकेययोर्युद्धविन्यासः
धिग्जीवितमिदं चैव सुहृद्धीनश्व॒ संजय । अद्य चाहं दशामेतां गत: संजय गर्हिताम्
dhig jīvitam idaṃ caiva suhṛd-hīnaśva sañjaya | adya cāhaṃ daśām etāṃ gataḥ sañjaya garhitām ||
संजय, इस जीवन को धिक्कार है—जो सुहृदों से रहित है। संजय, आज मैं इस निन्दित दशा को प्राप्त हो गया हूँ।
धृतराष्ट उवाच