वायुर्वियत्स्थैरीरितो भूतसंघै- रुवाह दिव्य: सुरभिस्तदानीम् | अर्जुनके महान् अस्त्रोंद्रारा आकाशमें घोर अन्धकार फैल जानेसे उस समय वहाँ पक्षी भी नहीं उड़ पाते थे। तब अन्तरिक्षमें खड़े हुए प्राणिसमूहोंसे प्रेरित होकर तत्काल वहाँ दिव्य सुगन्धित वायु चलने लगी
अर्जुन के महान् अस्त्रों से आकाश में घोर अन्धकार फैल जाने पर उस समय वहाँ पक्षी भी उड़ नहीं पाते थे। तब अन्तरिक्ष में स्थित प्राणि-समूहों से प्रेरित होकर तत्काल वहाँ दिव्य, सुगन्धित वायु चलने लगी।
संजय उवाच