तैश्वातिवेगात् स तथाविधो5पि नीत: शमं वल्लिरतिप्रचण्ड: । बलाहकैरेव दिगन्तराणि व्याप्तानि सर्वाणि यथा नभशक्ष
taiś cātivegāt sa tathāvidho ’pi nītaḥ śamaṁ vallir atipracandaḥ | balāhakair eva digantarāṇi vyāptāni sarvāṇi yathā nabhaḥ ||
संजय बोला—उनके अत्यन्त वेग के कारण वह भी, ऐसा पराक्रमी होते हुए, शान्त कर दिया गया—मानो अति प्रचण्ड लता सहसा थम गई हो। जैसे नभ में घनघोर मेघों ने समस्त दिशाओं और विदिशाओं को ढक लिया हो।
संजय उवाच