भरतनन्दन! उन दोनों रथोंको एक-दूसरेसे सटा देख सब राजा सिंहनाद करने और प्रचुर साधुवाद देने लगे ।। दृष्टवा च द्वैरथं ताभ्यां तत्र योधा: सहस्रश: । चक्रुर्बाहस्वनांश्वैव तथा चैलावधूननम्,उन दोनोंका द्वैरथ युद्ध प्रस्तुत देख वहाँ खड़े हुए सहस्रों योद्धा अपनी भुजाओंपर ताल ठोकने और कपड़े हिलाने लगे
bharatanandana! tau rathau parasparaṃ saṃlagnaṃ dṛṣṭvā sarve rājānaḥ siṃhanādaṃ cakruḥ pracuraṃ ca sādhuvādaṃ vyadadhuḥ || dṛṣṭvā ca dvairathaṃ tābhyāṃ tatra yodhāḥ sahasraśaḥ | cakrur bāhusvanāṃś caiva tathā cailāvadhūnanam ||
संजय बोले—हे भरतनन्दन! उन दोनों रथों को एक-दूसरे से सटा देखकर सब राजा सिंहनाद करने लगे और प्रचुर साधुवाद देने लगे। और उन दोनों का द्वैरथ-युद्ध उपस्थित देख वहाँ खड़े सहस्रों योद्धा भुजाओं पर ताल ठोकने लगे तथा वस्त्र हिलाकर हर्ष प्रकट करने लगे।
संजय उवाच