ब्रूहीदानीं तु संहृष्ट: पुनर्गौरिति गौरिति । “नराधम दुःशासन! यह देख, मैं तेरे गलेका खून पी रहा हूँ। अब इस समय पुनः हर्षमें भरकर मुझे 'बैल-बैल' कहकर पुकार तो सही
brūhīdānīṁ tu saṁhṛṣṭaḥ punar gaur iti gaur iti | “narādhama duḥśāsana! iha paśya, ahaṁ te gale-kā khūnaṁ pī rāhā hūṁ | adya etasmin samaye punaḥ harṣeṇa pūrṇaḥ san māṁ ‘gaur-gaur’ iti uktvā punar āhvaya eva” ||
संजय बोले—“अब तो हर्ष में भरकर फिर से ‘बैल-बैल’ कहकर पुकार। नराधम दुःशासन! देख, मैं तेरे गले का खून पी रहा हूँ। इसी समय उन्मत्त हर्ष में आकर फिर मुझे ‘बैल, बैल’ कहकर बुला।”
संजय उवाच