स तत् कृत्वा राजपुत्रस्तरस्वी विव्याध भीम॑ नवशभि: पृषत्कै: । ततो5भिनद् बहुभि: क्षिप्रमेव वरेषुभिर्भीमसेनं महात्मा,ऐसा करके उस वेगशाली राजपुत्रने भीमसेनपर नौ बाणोंका प्रहार किया। इसके बाद महामना दुःशासनने बड़ी फुर्तीके साथ बहुत-से उत्तम बाणोंद्वारा भीमसेनको अच्छी तरह बींध डाला
sa tat kṛtvā rājaputras tarasvī vivyādha bhīmaṁ navaśabhiḥ pṛṣatkaiḥ | tato 'bhinad bahubhiḥ kṣipram eva vareṣubhir bhīmasenaṁ mahātmā ||
ऐसा करके उस वेगशाली राजकुमार ने भीम को नौ बाणों से बेधा। फिर उस महात्मा ने शीघ्र ही अनेक उत्तम बाणों से भीमसेन को बार-बार घायल किया।
संजय उवाच