अतीव पार्थो युधि कार्मुकिभ्यो नारायणश्षाप्रति चक्रयुद्धे । एवंविधौ पाण्डववासुदेवौ चलेत् स्वदेशाद्धिमवान् न कृष्णौ
atīva pārtho yudhi kārmukibhyo nārāyaṇaḥ śāprati cakrayuddhe | evaṃvidhau pāṇḍavavāsudevau calet svadeśāddhimavān na kṛṣṇau ||
युद्ध में पार्थ (अर्जुन) सब धनुर्धरों से अत्यन्त श्रेष्ठ हैं और नारायण (श्रीकृष्ण) चक्र-युद्ध में अप्रतिम हैं। ऐसे हैं पाण्डव और वासुदेव—जैसे हिमालय अपने देश से नहीं डिगता, वैसे ये दोनों कृष्ण कभी विचलित नहीं होते।
कर्ण उवाच