अर्जुनस्य वच: श्रुत्वा गोविन्दो<र्जुनमब्रवीत् । एष गच्छामि सुक्षिप्रं यत्र भीमो व्यवस्थित:,अर्जुनकी बात सुनकर श्रीकृष्णने उनसे कहा--“यह लो, मैं बहुत जल्दी उस स्थानपर जा पहुँचता हूँ, जहाँ भीमसेन खड़े हैं!
arjunasya vacaḥ śrutvā govindo 'rjunam abravīt | eṣa gacchāmi sukṣipraṃ yatra bhīmo vyavasthitaḥ ||
अर्जुन की बात सुनकर श्रीकृष्ण ने उनसे कहा—“अच्छा, मैं बहुत शीघ्र वहाँ पहुँचता हूँ जहाँ भीम खड़े हैं।”
संजय उवाच