एकं रथं सम्परिवार्य मृत्युं नयन्त्यनेके च रथा: समेता: । एकस्तथैकं रथिन रथाग्रयां- स्तथा रथश्चापि रथाननेकान्
बहुत-से रथी एक साथ मिलकर किसी एक रथी को घेर लेते और उसे मृत्यु के पथ पर पहुँचा देते। और कहीं एक ही रथी किसी एक रथी को, यहाँ तक कि अनेक श्रेष्ठ रथियों को भी, यमलोक का पथिक बना देता; तथा एक रथ ही अनेक रथों को परास्त कर देता।
संजय उवाच