शरान् नानाविधान् मुक््त्वा त्रासयिष्यामि शात्रवान् | आकर्णममुक्तैरिषुभिययमराष्ट्रविवर्धनी:
śarān nānāvidhān muktvā trāsayiṣyāmi śātravān | ākarṇam amuktair iṣubhir yayama-rāṣṭra-vivardhanī ||
संजय बोले— “मैं नाना प्रकार के बाण छोड़कर शत्रुओं को त्रस्त कर दूँगी। कान तक खींचकर छोड़े गए बाणों की झड़ी लगाऊँगी”— ऐसा यदुवंश की राजकुमारी सत्यभामा ने कहा; उसके वचन अपने पक्ष का उत्साह बढ़ाने वाले थे।
संजय उवाच