समितौ गर्जते कर्णस्तमद्य जहि भारत । 'भारत! अत्यन्त खोटी बुद्धिवाले दुरात्मा दुर्योधनका उत्साह बढ़ाता हुआ कर्ण राजसभामें उपर्युक्त बातें कहकर गर्जता रहता है; इसलिये आज तुम उसे मार डालो ।। ६९ हे || यच्च युष्मासु पापं वै धार्त॑राष्ट्र: प्रयुक्ततान्
समर में कर्ण गर्जता रहता है—‘हे भारत! आज ही उसे मार डालो।’ और धृतराष्ट्रपुत्र ने तुम लोगों के प्रति जो-जो पाप किया है, उन सबका हेतु कर्ण ही है।
संजय उवाच