रोचितो भवता सार्थ जानतापि बल तव । “कुन्तीनन्दन! तुम्हारे बलको जानते हुए भी दुर्योधनने कर्णका भरोसा करके ही तुम्हारे साथ युद्ध छेड़ना पसंद किया है
rocito bhavatā sārtha jñānatāpi bala tava | kuntīnandana! tvad-balaṃ jñātvāpi duryodhanena karṇa-bharosāyaiva tvayā saha yuddhaṃ chettum iṣṭam |
संजय बोले—“हे कुन्तीनन्दन! तुम्हारा बल जानते हुए भी दुर्योधन ने केवल कर्ण पर भरोसा करके ही तुम्हारे साथ युद्ध छेड़ना उचित समझा है।”
संजय उवाच