को हि शान्तनवं भीष्म॑ द्रोणं वैकर्तनं कृपम् द्रौणिं च सौमदत्ति च कृतवर्माणमेव च,“नरव्याप्र! अक्षौहिणी सेनाके अधिपति, वीर, अस्त्रवेत्ता, भयंकर पराक्रमी, संगठित, रणोन्मत्त, तथा कभी पीछे न हटनेवाले भीष्म, द्रोण, कृपाचार्य, वैकर्तन कर्ण, अश्वत्थामा, भूरिश्रवा, कृतवर्मा, जयद्रथ, शल्य तथा राजा दुर्योधन-जैसे समस्त महारथियोंपर इस जगतमें तुम्हारे सिवा, दूसरा कौन पुरुष विजय पा सकता है?
ko hi śāntanavaṁ bhīṣmaṁ droṇaṁ vaikartanaṁ kṛpam | drauṇiṁ ca saumadattiṁ ca kṛtavarmāṇam eva ca ||
संजय बोले—शान्तनुनन्दन भीष्म, द्रोण, वैकर्तन कर्ण, कृपाचार्य, द्रोणपुत्र अश्वत्थामा, सौमदत्तपुत्र भूरिश्रवा और कृतवर्मा—इन सबको इस जगत में कौन जीत सकता था?
संजय उवाच