तेषामापततां शूर: पञ्चालानां तरस्विनाम् | आदत्तासूज्शरै: कर्ण: पतज्रानामिवानलः
teṣām āpatatāṁ śūraḥ pañcālānāṁ tarasvinām | ādatta asūñ śaraiḥ karṇaḥ pataṅgānām ivānalaḥ ||
उन वेगशाली पाञ्चाल शूरों के टूट पड़ने पर वीर कर्ण ने अपने बाणों से उनके प्राण हर लिये—जैसे अग्नि पास आये पतंगों को भस्म कर देती है।
संजय उवाच