अहं त्वामनुजानामि वीर्येण च बलेन च । जहि कर्ण रणे शूर मातज्रमिव केसरी,जैसे सिंह मतवाले हाथीको मार डालता है, उसी प्रकार तुम भी अपने बल और पराक्रमसे रणभूमिमें शूरवीर कर्णको मार डालो। इसके लिये मैं तुम्हें आज्ञा देता हूँ
ahaṁ tvām anujānāmi vīryeṇa ca balena ca | jahi karṇa raṇe śūra mātaṅgam iva kesarī ||
मैं तुम्हें आज्ञा देता हूँ और तुम्हें पराक्रम तथा बल से समर्थ करता हूँ। हे शूर! जैसे सिंह मतवाले हाथी को गिरा देता है, वैसे ही रण में कर्ण का वध करो।
वायुदेव उवाच