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Shloka 15

कर्णवधोत्तरं शल्य-दुर्योधनसंवादः

Aftermath of Karṇa’s Fall: Śalya’s Address to Duryodhana

इत्यन्तरिक्षे शतश्‌ड्रमूर्श्नि तपस्विनां शृण्वतां वागुवाच । एवंविधं तच्च नाभूत्‌ तथा च देवापि नूनमनृतं वदन्ति

शतशृंग पर्वत के शिखर पर तपस्वी महात्माओं के सुनते हुए आकाशवाणी ने ये बातें कही थीं; परन्तु वैसा हुआ नहीं। इसलिए निश्चय ही देवता भी असत्य बोलते हैं।

संजय उवाच