आयाहि पश्याद्य युयुत्समानं मां सूतपुत्रस्य रणे जयाय । महोरगस्येव मुखं प्रपन्ना: प्रभद्रका: कर्णमभिद्रवन्ति,आइये, देखिये, आज मैं रणभूमिमें सूतपुत्रपर विजय पानेके लिये युद्ध करना चाहता हूँ। प्रभद्रकगण कर्णपर धावा कर रहे हैं, ऐसा करके वे मानो अजगरके मुखमें पड़ गये हैं
आइए, देखिए—आज मैं रणभूमि में सूतपुत्र पर विजय पाने के लिए युद्ध करना चाहता हूँ। प्रभद्रकगण कर्ण पर धावा बोल रहे हैं; ऐसा करके वे मानो महाअजगर के मुख में जा पड़े हों।
अजुन उवाच