अर्जुनकर्णसंनिपातवर्णनम् / The Convergence of Arjuna and Karṇa
आशीविषसमं युद्धे सर्वशस्त्रविशारदम्,कर्ण युद्धमें विषधर सर्पके समान भयंकर, सम्पूर्ण शस्त्र-विद्याओंमें निपुण तथा कौरवोंका अगुआ था। वह शत्रुपक्षमें सबका कल्याण-साधक और कवच बना हुआ था। वृषसेन और सुषेण-जैसे धनुर्धर उसकी रक्षा करते थे
āśīviṣa-samaṁ yuddhe sarva-śastra-viśāradaṁ | karṇaṁ yuddhe viṣadhara-sarpa-samānaṁ bhayaṅkaraṁ sampūrṇa-śastra-vidyāsu nipuṇaṁ tathā kauravāṇām agraṇīṁ | sa śatru-pakṣe sarveṣāṁ kalyāṇa-sādhakaḥ kavaca-bhūta iva tiṣṭhati | vṛṣasena-suṣeṇa-prabhṛtayo dhanurdharās tasya rakṣakā āsan ||
युधिष्ठिर बोले— युद्ध में कर्ण विषधर सर्प के समान भयंकर था और समस्त शस्त्रविद्याओं में निपुण था। वह कौरवों का अग्रणी था और शत्रुपक्ष में अपने जनों के हित का कवच बना हुआ था। वृषसेन और सुषेण जैसे धनुर्धर उसकी रक्षा करते थे—फिर युद्ध में पार्थ ने उसे कैसे मारा?
युधिषछ्िर उवाच