कर्णार्जुनसमागमः — The Karṇa–Arjuna Confrontation
Cosmic Spectatorship and Vows
ते वध्यमाना: कर्णेन पञज्चालाश्रेदिभि: सह । तत्र तत्र व्यमुहान्त वनदाहे यथा द्विपा:
कर्ण के द्वारा मारे जाते हुए पांचाल और चेदि योद्धा, जैसे वन में आग लगने पर वहाँ के हाथी जलकर जहाँ-तहाँ मूर्च्छित होकर गिर पड़ते हैं, वैसे ही रणभूमि में तत्र-तत्र मूर्च्छित होकर पड़े थे।
संजय उवाच