अध्याय ६० — कर्णस्य पाञ्चाल-सोमक-निग्रहः
Karna’s Suppression of the Panchala–Somaka Forces
सौबलस्तस्य समरे क्रुद्धो राजन् प्रतापवान् । विदार्य कवचं भूयो ध्वजं चिच्छेद काज्चनम्,राजन! समरांगणमें कुपित हुए प्रतापी सुबलपुत्रने सात्यकिके कवचको छिउ्न-भिन्न करके उनके सुवर्णमय ध्वजको भी काट दिया
saubalastasya samare kruddho rājan pratāpavān | vidārya kavacaṃ bhūyo dhvajaṃ ciccheda kāñcanam ||
राजन्! समर में क्रुद्ध हुए प्रतापी सुबलपुत्र ने उसका कवच फाड़ डाला और फिर उसके स्वर्णमय ध्वज को भी काट गिराया।
संजय उवाच