जिधघांसु: पुरुषव्याप्र भ्रातृभि: सहितो बली । आशीविषसमस्पर्श: सर्वयुद्धविशारदै:,'पुरुषसिंह! जिनका स्पर्श विषधर सर्पोके समान भयंकर है तथा जो सम्पूर्ण युद्ध- कलाओंमें निपुण हैं, उन भाइयोंके साथ बली दुर्योधन राजा युधिष्ठिरको मार डालनेकी इच्छासे उनके पीछे लगा हुआ है
हे पुरुषसिंह! बलवान् दुर्योधन अपने भाइयों के साथ, जिनका स्पर्श विषधर सर्प के समान भयंकर है और जो समस्त युद्ध-कलाओं में निपुण हैं, राजा युधिष्ठिर को मार डालने की इच्छा से उनके पीछे लगा हुआ है।
संजय उवाच