Karṇa-parva Adhyāya 58 — Arjuna’s Arrow-Storm and Relief of Bhīmasena
यथा हि समरे द्रोण: पार्षतं वीक्ष्य मारिष
जैसे समर में द्रोणाचार्य पार्षत धृष्टद्युम्न को देखकर मन-ही-मन खिन्न हो उसे अपनी मृत्यु मानते थे, वैसे ही शत्रुवीरों का संहार करने वाला पार्षत धृष्टद्युम्न भी रणभूमि में द्रोणपुत्र अश्वत्थामा को देखकर प्रसन्न न हुआ और उसे अपनी मृत्यु समझने लगा।
संजय उवाच