अर्जुनस्य शीघ्रप्रयाणं भीम-शकुनियुद्धं च
Arjuna’s Rapid Advance and the Bhīma–Śakuni Encounter
अड्भाड्रावयवैश्क्िन्नैव्यायुधास्तेडपतन् भुवि । विष्वग्वाताभिसम्भग्ना बहुशाखा इव द्रुमा:
जैसे चारों ओर से उठी आँधी से अनेक शाखाओं वाले वृक्ष उखड़कर धराशायी हो जाते हैं, वैसे ही अंग-प्रत्यंग कट जाने से वे शस्त्रहीन शत्रु भूमि पर गिर पड़ते थे।
संजय उवाच