भीमसेनस्य वेगाभिपातः—विशोकसारथिसंवादश्च
Bhīma’s surge and dialogue with charioteer Viśoka
सात्यकिर्धर्मराजश्न पञ्चालाक्षापि संगता: । त्यक्त्वा मृत्युभयं घोरं द्रौणायनिमुपाद्रवन्
तदनन्तर जब पाण्डव-सेना मारी जाने लगी, तब महारथी द्रौपदीपुत्र, सात्यकि, धर्मराज युधिष्ठिर और पाञ्चाल-सेना संगठित होकर घोर मृत्युभय त्यागकर द्रोणपुत्र पर टूट पड़े।
संजय उवाच