अध्याय ५३ — रणमेघोपमा सेना-वर्णना तथा सुषेण-वधोत्तर प्रतिक्रिया
Battle-as-Storm Imagery and the Aftermath of Suṣeṇa’s Fall
कृपस्तु शरवर्ष तद् विनिहत्य महास्त्रवित् । शिखण्डिनं रणे क्रुद्धो विव्याध दशभि: शरै:,महान् अस्त्रवेत्ता कृपाचार्यने शिखण्डीकी उस बाण-वर्षाका निवारण करके कुपित हो उसे दस बाणोंद्वारा घायल कर दिया
sañjaya uvāca |
kr̥pastu śaravarṣa tad vinihatya mahāstravit |
śikhaṇḍinaṃ raṇe kruddho vivyādha daśabhiḥ śaraiḥ ||
संजय बोले—महान अस्त्रवेत्ता कृपाचार्य ने उस बाण-वर्षा को रोक दिया और रण में क्रुद्ध होकर शिखण्डी को दस बाणों से बेध दिया।
संजय उवाच