कर्णवधार्थं धनञ्जयस्य प्रतिज्ञा — Arjuna’s resolve for Karṇa’s defeat
नानावादित्रनिनदा: सिंहनादाश्न जज्ञिरे उन बाणोंकी गहरी चोट खाकर अर्जुन व्यथित हो रथके पिछले भागमें बैठ गये। फिर तो सब लोग जोर-जोरसे चिल्लाकर कहने लगे कि “अर्जुन मारे गये!! उस समय शंख बजने लगे, भेरियोंकी गम्भीर ध्वनि फैलने लगी तथा नाना प्रकारके वाद्योंकी ध्वनिके साथ ही योद्धाओंकी सिंहगर्जना भी होने लगी
sañjaya uvāca | nānā-vāditra-ninadāḥ siṃha-nādāś ca jajñire | tān bāṇānāṃ gāḍha-prahāraṃ prāpya arjunaḥ vyathitaḥ rathasya paścād-bhāge niṣasāda | tataḥ sarve janāḥ uccaiḥ-śabdena praruruvuḥ—“arjuno hataḥ!” iti | tasmin kāle śaṅkhāḥ prāduḥśabdam akurvan, bherīṇāṃ gambhīrā dhvaniḥ prasasāra, nānā-vidha-vādyānāṃ ninādaiḥ sārdhaṃ yodhānāṃ siṃha-garjanā api babhūva |
संजय बोले—नाना प्रकार के वाद्यों का कोलाहल और योद्धाओं की सिंह-गर्जना उठने लगी। उन बाणों की गहरी चोट से व्यथित होकर अर्जुन रथ के पिछले भाग में बैठ गये। तब सब लोग जोर-जोर से चिल्लाने लगे—“अर्जुन मारे गये!” उसी समय शंख बज उठे, भेरियों की गम्भीर ध्वनि फैल गयी और विविध वाद्यों के शोर के साथ योद्धाओं की सिंहगर्जना भी गूँजने लगी।
संजय उवाच