कर्णवधार्थं धनञ्जयस्य प्रतिज्ञा — Arjuna’s resolve for Karṇa’s defeat
निश्रैष्टांस्तु ततो योधानवधीत् पाण्डुनन्दन: । यथेन्द्र: समरे दैत्यांस्तारकस्य वधे पुरा
फिर जैसे पूर्वकाल में तारकासुर-वध के समय समर में इन्द्र ने दैत्यों का संहार किया था, वैसे ही पाण्डुनन्दन अर्जुन ने निःशेष्ट हुए संशप्तक योद्धाओं का वध आरम्भ किया।
संजय उवाच