कृष्णेन अर्जुनस्य प्रोत्साहनम् — Kṛṣṇa’s Exhortation to Arjuna
Prelude to Karṇa’s Slaying
भौमेन रजसा<5<कीर्णे शस्त्रसम्पातसंकुले । नैव स्वे न परे राजन् व्यज्ञायन्त तमोवृता:
राजन्! शस्त्रों की निरन्तर वर्षा से व्याप्त और धरती की धूल से आच्छादित उस प्रदेश में, अन्धकार से घिरे होने के कारण न अपने सैनिक पहचाने जाते थे, न शत्रुपक्ष के।
संजय उवाच