कृष्णोपदेशः, अर्जुनस्य क्षमा-याचनम्, कर्णवध-अनुज्ञा
Krishna’s Counsel, Arjuna’s Apology, and Authorization for Karṇa’s Slaying
पाण्डवं पड्चविंशत्या नाराचानां समार्पयत् । आजजलने बहुभिर्बाणैर्ध्वजमेकेषुणाहनत्
कर्ण ने पाण्डव (भीम) को पचीस नाराचों से बींध दिया और फिर अनेक बाणों से आघात करके एक ही बाण से उसकी ध्वजा काट डाली।
संजय उवाच