कर्णनिधनश्रवणम् — Hearing of Karṇa’s Fall and Dhṛtarāṣṭra’s Lament
अभिमन्योर्व॑ं श्रुत्वा प्रतिज्ञामपि चात्मन: । धनंजयेन विक्रम्प गमितो यमसादनम्,जो समरभूमिमें कर्णके समान ही पराक्रमी था, शीघ्रतापूर्वक अस्त्र चलानेवाला, सुदृढ़ बल-विक्रमसे सम्पन्न और महान् तेजस्वी था, वह कर्णपुत्र वृषसेन अभिमन्युका वध सुनकर की हुई अपनी प्रतिज्ञाको याद रखनेवाले अर्जुनके साथ भिड़कर कर्णके देखते-देखते उनके द्वारा यमलोक पहुँचा दिया गया
sañjaya uvāca |
abhimanyor vadhaṃ śrutvā pratijñām api cātmanaḥ |
dhanañjayena vikramya gamito yamasādanam ||
संजय बोले—अभिमन्यु-वध का समाचार सुनकर और अपनी प्रतिज्ञा को स्मरण करके, रण में कर्ण के समान पराक्रमी, शीघ्र अस्त्र चलाने वाला, दृढ़ विक्रम और महान तेज से युक्त वह योद्धा धनंजय अर्जुन से युद्ध में जुटा; और कर्ण के देखते-देखते अर्जुन ने उसे मारकर यमलोक पहुँचा दिया।
संजय उवाच