धर्मरहस्योपदेशः
Dharma-rahasya Instruction: Vows, Truth, and Non-injury
शल्य उवाच पश्य कर्ण महाबाहुं संक़ुद्धं पाण्डुनन्दनम् । दीर्घकालार्जित क्रोधं मोक्तुकामं त्वयि ध्रुवम्
शल्य बोले—कर्ण! क्रोध से भरे हुए उस महाबाहु पाण्डुनन्दन भीमसेन को देखो, जो दीर्घकाल से संचित क्रोध को आज निश्चय ही तुम पर छोड़ना चाहता है।
शल्य उवाच