युधिष्ठिरस्य धनंजय-प्रति गर्हा
Yudhiṣṭhira’s Reproach to Dhanaṃjaya
ततः पूर्णायतोत्कृष्टं यमदण्डनिभं शरम् | मुमोच त्वरितो राजा सूतपुत्रजिघांसया,तत्पश्चात् राजा युधिष्ठिरने सूतपुत्रको मार डालनेकी इच्छासे तुरंत ही धनुषको पूर्णरूपसे खींचकर वह यमदण्डके समान बाण उसके ऊपर छोड़ दिया
tataḥ pūrṇāyatotkṛṣṭaṃ yamadaṇḍanibhaṃ śaram | mumoca tvarito rājā sūtaputrajighāṃsayā ||
तब राजा युधिष्ठिर ने सूतपुत्र को मार डालने की इच्छा से धनुष को पूर्णतः खींचकर यमदण्ड के समान भयानक उत्कृष्ट बाण शीघ्रता से उस पर छोड़ दिया।
संजय उवाच