युधिष्ठिरस्य धनंजय-प्रति गर्हा
Yudhiṣṭhira’s Reproach to Dhanaṃjaya
ततो युधिष्ठिर: कर्णमदूरस्थं निवारितम् | अब्रवीत् परवीरघ्नं क्रोधसंरक्तलोचन:,उस समय युधिष्ठिरने क्रोधसे लाल आँखें करके शत्रुवीरोंका संहार करनेवाले कर्णसे जो पास ही रोक दिया गया था, इस प्रकार कहा--
tato yudhiṣṭhiraḥ karṇam adūrasthaṃ nivāritam | abravīt paravīraghnaṃ krodhasaṃraktalocanaḥ ||
तब क्रोध से लाल नेत्र किए युधिष्ठिर ने, जो पास ही रोक दिए गए शत्रुवीर-संहारक कर्ण से, इस प्रकार कहा।
संजय उवाच